संकटमोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanumanashtak) क्या है, लाभ, पाठ करने का सही तरीका

जब व्यक्ति के पास कोई रास्ता ना हो, घोर संकट में फंस गया हो, परेशानियों में गिरा हो, कोई रास्ता नजर ना आ रहा हो, तो आपको हनुमान अष्टक का पाठ करना चाहिए यह एक ऐसा पाठ है जिसे करने से सभी समस्याओं का निवारण होता है। 

संकट मोचन हनुमान अष्टक के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है इसलिए इस लेख के माध्यम से हम आपको संकटमोचन हनुमानाष्टक के बारे में विस्तार पूर्वक संपूर्ण जानकारी बताएंगे कि संकट मोचन हनुमान अष्टक क्या है संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ कितनी बार करना चाहिए और कैसे करना चाहिए। साथ ही हम बताएंगे कि संकटमोचन हनुमानाष्टक को सिद्ध करने का सही तरीका क्या है।

Hanuman ashtak संकटमोचन हनुमान अष्टक (Sankatmochan Hanumanashtak)

संकटमोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanumanashtak) क्या है, लाभ, पाठ करने का सही तरीका

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो।।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो।।


बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो ।।
चौंकि महामुनि साप दियो तब ,
चाहिए कौन बिचार बिचारो ।।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो ।। 
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो।।


अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो ।।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु ,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।।
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब ,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ।।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो।।


रावण त्रास दई सिय को सब ,
राक्षसी सों कही सोक निवारो ।।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,
जाए महा रजनीचर मरो ।।
चाहत सीय असोक सों आगि सु ,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ।।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो।।


बान लाग्यो उर लछिमन के तब ,
प्राण तजे सूत रावन मारो ।।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत ,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।।
आनि सजीवन हाथ दिए तब ,
लछिमन के तुम प्रान उबारो ।।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो।।


रावन जुध अजान कियो तब ,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल ,
मोह भयो यह संकट भारो ।।
आनि खगेस तबै हनुमान जु ,
बंधन काटि सुत्रास निवारो ।।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो।।


बंधू समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो ।।
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि ,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।।
जाये सहाए भयो तब ही ,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो ।।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो।।


काज किये बड़ देवन के तुम ,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।।
कौन सो संकट मोर गरीब को ,
जो तुमसे नहिं जात है टारो ।।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु ,
जो कछु संकट होए हमारो ।।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो।।


दोहा
लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर ।
वज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर ।।


Album: Shree Hanuman ashtak - Hanuman Ashtak

Singer: Hariharan

Composer: LALIT SEN, CHANDER

Author: Traditional (Tulsi Das)



संकटमोचन हनुमान अष्टक (Sankatmochan Hanumanashtak) क्या है।

हनुमान जी को कौन नहीं जानता है हनुमान जी त्रेता, द्वापर और कलयुग में सदैव श्रद्धा के पात्र रहे हैं कलयुग में तो उन्हें सर्व समर्थ प्रत्यक्ष और आशुतोष देवता के रूप में स्मरण किया जाता है। तंत्र मंत्र के वीर साधनाओं में हनुमान जी का स्थान सर्वोपरि है हनुमान जी शक्ति के आगार है भक्ति के भंडार हैं सहनशीलता के समुद्र हैं और विद्याओं में अद्वितीय हैं राजनीति कूटनीति और दूत कला में विशेषज्ञ हैं शत्रु शास्त्र में हनुमत प्रयोग अमोघ है हनुमान जी नैष्टिक ब्रह्मचारी हैं इस कारण संतान प्राप्ति और गृहस्थ सुख के लिए इनकी साधना जरूर करनी चाहिए लेकिन भूत प्रेत पिशाच राक्षस जन्म बाधाओं के निवारण के लिए बंधी मोक्ष तथा विश हरण प्रयोग के लिए इनकी उपासना अमोघ है।

जब व्यक्ति परेशानियों से गिरा हो घोर संकट में फंस गया हूं चारों ओर अंधकार ही अंधकार दिखाई दे रहा हो अकारण जेल चला गया हो और जमानत नहीं हो पा रही हो ऐसे संकटों से निकलने का कोई रास्ता ना दिखाई दे रहा हो तब ऐसे समय में मतंग यंत्र नामक 8 से निर्मित हनुमान अष्टक का पाठ करना चाहिए। 

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संकटमोचन हनुमान अष्टक (Sankatmochan Hanumanashtak) का कितनी बार पाठ करना चाहिए

ऐसे व्यक्ति को संकट मोचन हनुमान अष्टक मुक्ति दिलाता है संकट मोचन हनुमान आज तक के 10800 बाहर पाठ करने से एक अनुष्ठान पूरा होता है यह दशांश हवन का विधान है दशांश हवन करना चाहिए। पूर्ण आहुति के साथ ब्राह्मणों को भोजन और बंदरों को गुड़ चना खिलाया जाता है इसका मूल पाठ तो आप और हम सब जानते हैं यदि आप नहीं जानते हैं शुरुआत की कुछ लाइनें इस प्रकार है कि

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,

तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।।

ताहि सों त्रास भयो जग को,

यह संकट काहु सों जात न टारो।।

देवन आनि करी बिनती तब,

छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।।

को नहीं जानत है जग में कपि,

संकटमोचन नाम तिहारो।।

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संकटमोचन हनुमान अष्टक (Sankatmochan Hanumanashtak) को सिद्ध करने का सही तरीका

हनुमान अष्टक को सिद्ध करने के लिए 1800 बार पाठ करना चाहिए यदि अपने 10800 पाठ कर लिया तो यह पूर्ण रूप से सिद्ध हो जाएगा यदि आप 10800 बार पाठ नहीं कर पा रहे हैं तो 1800 बार कर ले यदि 1800 बार नहीं कर पा रहे हैं तो 108 बार कर ले इससे आपकी सभी समस्याओं का निवारण हो जाएगा

मंगलवार के दिन स्नान आदि करने के बाद हनुमान जी के मंदिर में जाकर यह संकल्प ले कि मेरा यह कार्य है(जो भी आपका कार्य है) इस कार्य के निवारण हेतु मैं संकट मोचन हनुमान अष्टक का पाठ करने जा रहा हूं उसके बाद जल को नीचे छोड़ दें और श्रद्धा अनुसार से 108 बार या 1008 बार या 10008 बार जितने की आपकी क्षमता हो उतने का संकल्प लेकर पाठ करें आपकी सभी समस्याएं जरूर दूर होंगी।

निष्कर्ष

जय श्री हनुमान। इस लेख में हमने संकट मोचन हनुमान जी के बहुत ही प्रिय संकट मोचन हनुमान अष्टक के बारे में संपूर्ण जानकारी विस्तार पूर्वक बताएं है।

मैं आशा करता हूं कि आपको संकट मोचन हनुमान अष्टक के बारे में यह जानकारी पसंद आई होगी अगर आपके कुछ सुझाव या सवाल है तो आप हमें नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बता सकते हैं धन्यवाद। जय श्री हनुमान।