कैसे करें हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ।

देखिए hanuman chalisa के बारे में जानने के लिए सबसे पहले हमें हनुमान जी के बारे में जानना आवश्यक है। हनुमान जी, भगवान शिव के 11 वें अवतार हैं इसलिए हनुमान जी को रुद्रावतार (रूद्र = शिव जी का अंश) भी कहा जाता है।

रुद्रावतार, हनुमान जी की कृपा कलयुग में सबसे ज्यादा कल्याणकारी है क्योंकि जो सप्त चिरंजीवी (जिसकी कभी मृत्यु ना हो=चिरंजीवी) हैं अश्वत्थामा जी, महर्षि व्यास जी, राजा बलि जी, परशुराम जी, विभीषण जी, श्री हनुमान जी और कृपाचार्य जी  जो कलयुग में भी प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद प्रदान करते हैं उन सप्त चिरंजीवी में हनुमान जी भी हैं।


"अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता" हनुमान जी की कृपा से साधक को अष्ट सिद्धियां और नव निधियां का आशीर्वाद भी प्राप्त हो जाता है। हनुमान जी के पास अष्ट सिद्धियां और नव निधियं थी। और माता सीता जी के वरदान देने के बाद हनुमान जी अपने साधकों, को इनको प्रदान कर सकते हैं।  

कलयुग में सबसे ज्यादा सरल और उत्तम विधि है वह हनुमान चालीसा है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा लिखी। 

Hanuman Chalisa में हनुमान जी के 108 नाम आए, तो अगर आप हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं तो आप हनुमान जी के 108 नामों का स्मरण करते हैं।  

हनुमत साधना जय श्री राम बोलने से, जय श्री हनुमान बोलने से भी पूर्ण होती है।  हनुमान जी की कृपा मिल जाती है लेकिन यदि आपको हनुमान जी की देव कृपा प्राप्त करनी है तो हनुमाान चालीसा का पाठ नीचे दिए गए तरीके से करें।

Hanuman chalisa lyrics

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥


बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार

बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार


चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥


राम दूत अतुलित बल धामा

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥


महाबीर बिक्रम बजरंगी

कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥


कंचन बरन बिराज सुबेसा

कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥


हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे

काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥


शंकर सुवन केसरी नंदन

तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥


विद्यावान गुनी अति चातुर

राम काज करिबे को आतुर॥७॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया

राम लखन सीता मनबसिया॥८॥


सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा

विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥


भीम रूप धरि असुर सँहारे

रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥


लाय सजीवन लखन जियाए

श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥


रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई

तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥


सहस बदन तुम्हरो जस गावै

अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥


सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा

नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥


जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते

कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥


तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा

राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥


तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना

लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥


जुग सहस्त्र जोजन पर भानू

लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥


प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही

जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥


दुर्गम काज जगत के जेते

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥


राम दुआरे तुम रखवारे

होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥


सब सुख लहैं तुम्हारी सरना

तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥


आपन तेज सम्हारो आपै

तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥


भूत पिशाच निकट नहि आवै

महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥


नासै रोग हरे सब पीरा

जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥


संकट तै हनुमान छुडावै

मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥


सब पर राम तपस्वी राजा

तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥


और मनोरथ जो कोई लावै

सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥


चारों जुग परताप तुम्हारा

है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥


साधु संत के तुम रखवारे

असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥


अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता

अस बर दीन जानकी माता॥३१॥


राम रसायन तुम्हरे पासा

सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥


तुम्हरे भजन राम को पावै

जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥


अंतकाल रघुवरपुर जाई

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥


और देवता चित्त ना धरई

हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥


संकट कटै मिटै सब पीरा

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥


जै जै जै हनुमान गुसाईँ

कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥


जो सत बार पाठ कर कोई

छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥


जो यह पढ़े हनुमान चालीसा

होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥


तुलसीदास सदा हरि चेरा

कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥


दोहा


पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

Credit

Album: Shree Hanuman Chalisa - Hanuman Ashtak

Singer: Hariharan

Composer: LALIT SEN, CHANDER

Author: Traditional (Tulsi Das)


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क्या है हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) पाठ करने की सिद्धि विधि

घर के उत्तर पूर्व में चौकी बिछाए या  अपने मंदिर में एक लाल कपड़े के ऊपर आशीर्वाद मुद्रा में हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का श्री विग्रह स्थापित करें या कोई फोटो लगाएं। 

हनुमान जी का श्री विग्रह या कोई फोटो सदैव आशीर्वाद मुद्रा में लगाएं। हनुमान जी का फोटो संजीवनी पर्वत उठाते हुए, भगवान राम और लक्ष्मण जी को अपने कंधे पर उठाते हुए या ध्यान मुद्रा में स्वयं बैठते हुए हनुमान जी का फोटो है लेकिन हमें ऐसा फोटो ही लेना है जिसमें हनुमान जी आशीर्वाद की मुद्रा में विराजमान हो। जिसमें उनका एक हाथ आशीर्वाद देते हुए है। 

ऐसा हनुमान जी का छायाचित्र, आप लाल कपड़े पर अपने मंदिर में स्थापित करें और एक घी का दीपक जलाएं। हनुमान जी के सम्मुख एक आसन पर बैठ कर आप यह अनुभूति करें, कि मैं यह पाठ किसी छायाचित्र या श्री विग्रह को नहीं सुना रहा हूं।  हनुमान जी साक्षात मेरे हैं सामने बेठे हुए हैं और मैं हनुमान चालीसा का पाठ उनके श्री चरणों में समर्पित कर रहा हूं। 

इस श्रद्धा और विश्वास के साथ आप हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का आनंद लेते हुए पाठ करें। 

हनुमान चालीसा की लाइन एक सिद्ध मंत्र की तरह है, हनुमान चालीसा की हर लाइन का अनुसंधान करें। 

आप हनुमान चालीसा का पाठ करने से पहले संकट मोचन हनुमान अष्टक का पाठ भी जरूर करें। 

(हनुमान अष्टक : बाल समय रवि भक्ष लियो तब तीनो लोक भयो अंधियारों)

क्योंकि हनुमान जी को उनकी शक्तियों का बोध कराना होता है। तब हनुमानजी जागृत होते हैं तो हनुमान जी को पहले जागृत करना है उसके बाद हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का पाठ करना है हनुमान जी के श्री चरणों में समर्पित करना है 

आप आसन पर बैठकर कम से कम 11 पाठ करें, 11 ना कर सके तो 7 पाठ करें 7 पाठ भी ना हो सके दो 5 पाठ करें और अगर 5 पाठ भी ना कर पाए तो कम से कम तीन पाठ अवश्य करें। 


और जब आप के तीन पाठ पूरे हो जाएं या 11 पाठ पूरे हो जाए तो फिर से एक बार संकट मोचन हनुमान अष्टक का पाठ करें यानी कि आप हनुमान चालीसा के  शुरू में और अंतर में संकट मोचन हनुमान अष्टक का पाठ अवश्य करें तो हनुमान जी की आप को दिव्य कृपा प्राप्त होगी। 

हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद उनकी आरती जरूर करें उस आरती को करने के बाद जो जल आपने हनुमान जी के सम्मुख रखा है उसका अपने पूरे घर में छिड़काव, अपने आप पर  और अपनी फैमिली पर छिड़काव करें।  तो घर के अंदर जितनी नकारात्मक ऊर्जा है वह सब समाप्त हो जाएगी। 

 हनुमान जी की कृपा से आपकी कुंडली में जितने भी पीड़ा देने वाले ग्रह हैं वह सब शांत हो जाएंगे  तो इस प्रकार से हनुमान जी का पाठ करें तो आपको जरूरत हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त होगी

निष्कर्ष 

मैं आशा करता हूं कि आपको हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) और उससे जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर मिल गए होंगे और और आपको हनुमान चालीसा के बारे में वह सभी जानकारी मिल गई होगी जो आप जानना चाहते थे और अगर आपके कोई डाउट है या आपको कोई समस्या आ रही है तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते हैं। 


जय श्री राम।।

जय श्री हनुमान।।

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